Saturday, 8 June 2013

।। शिव चालीसा।।

Monday, 3 June 2013

“हिन्दू धर्म मे चरण स्पर्श का वैज्ञानिक आधार”

“हिन्दू धर्म मे चरण स्पर्श का वैज्ञानिक आधार”

हिन्दू धर्म मे अपने से बड़े के अभिवादन के लिए चरण स्पर्श उत्तम माना गया है ॥ चरण स्पर्श से आपको सामने वाला व्यक्ति आयु, बल, यश, ज्ञान का आशीर्वाद देता है॥ आइये इसके वैज्ञानिक आधार की विवेचना करते हैं॥ वैज्ञानिक न्यूटन के नियम के अनुसार इस संसार में सभी वस्तुएँ "गुरूत्वाकर्षण" के नियम से बंधी हैं और गुरूत्व भार सदैव आकर्षित करने वाले की तरफ जाता है, हमारे शरीर में भी यही नियम है। सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना जाता है अर्थात् गुरूत्व ऊर्जा या चुंबकीय ऊर्जा या विद्युत चुंबकीय ऊर्जा सदैव उत्तरी ध्रुव से प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव की ओर प्रवाहित होकर अपना चक्र (cycle) पूरा करती है। इसका आशय यह हुआ कि मनुष्य के शरीर में उत्तरी ध्रुव (सिर) से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव (पैरों) की ओर प्रवाहित होती है और दक्षिणी ध्रुव पर यह ऊर्जा असीमित मात्रा मे स्थिर हो जाती है | यहाँ ऊर्जा का केंद्र बन जाता है, यही कारण है कि व्यक्ति सैकड़ो मील चलने के पश्चात् भी मनुष्य भी जड़ नहीं होता वो आगे चलने की हिम्मत रख सकता है।
ऐसा पैरों में संग्रहित इस ऊर्जा के कारण ही पाता है। शरीर क्रिया विज्ञानियों ने यह सिद्ध कर लिया है कि हाथों और पैरों की अंगुलियों और अंगूठों के पोरों (अंतिम सिरा) में यह ऊर्जा सर्वाधिक रूप से विद्यमान रहती है तथा यहीं से आपूर्ति और मांग की प्रक्रिया पूर्ण होती है। पैरों से हाथों द्वारा इस ऊर्जा के ग्रहण करने की प्रक्रिया को ही हम "चरण स्पर्श" करना कहते हैं।
इस प्रकार हिन्दू धर्म मे चरण स्पर्श की मान्यता पूर्णतया प्रामाणिक और वैज्ञानिक है।

Sunday, 2 June 2013

शर्तिया सुखी रहने के लिए अपनाये और फायदा उठाये

शर्तिया सुखी रहने के लिए अपनाये और फायदा उठाये

१. -ज्वार,बाजरा,मक्का,चावल मिक्स करके पक्षियों के लिए घर की छत पर डाले २. -. .मीठे चावल बना कर एक बर्तन में कौओ के लिए घर की छत पर डाले इनके न आने पर भी प्रतिदिन अपना नियम बनाये रखे कुछ दिन में ये अपने आप आने लगेगे और भोजन करने लगेगे 3. गाय को चारा डाले रोजाना चारा न डालने पर किसी गौ शाला में मासिक रूपये गौ चारे ने दे देवे इससे आपके सभी ग्रहदोष,पितृ दोष और अन्य सभी दोष समाप्त होगे धीरे धीरे आपके सभी काम बने चले जायेगे
इन प्रयोगों से आपको किसी भी जोतिषी,तांत्रिक या अन्य के पास जाने की जरुरत नहीं रहेगी
ये सभी अनुभूत प्रयोग है

Thursday, 30 May 2013

• क्या मैं किसी और का माला लेकर जप कर सकता हूँ ?



• शंका समाधान :

• क्या मैं किसी और का माला लेकर जप कर सकता हूँ ?
  प्रत्येक साधक ने अपना माला अलग रखना चाहिए क्योंकि माला से जप करते रहने से कुछ समय उपरांत माला में शक्ति आ जाती है और वह शक्ति हमारे मंत्र के और स्तर के और भाव के अनुसार आती है | यदि किसी व्यक्ति का स्तर अधिक हो और माला में अधिक शक्ति आ गयी हो तो उनके माला से किसी ऐसे साधक जिनका स्तर उनसे कम हो, उन्हें कष्ट हो सकता है क्योंकि उस माला में निहित शक्ति को वह सहन नहीं कर सकता फलस्वरूप नामजप करते समय मन एकग्र न हो पाना, सिर में भारीपन लगना जैसे कष्ट हो सकते हैं अतः अन्य किसी साधक के माला द्वारा जप करना टालें | मात्र गुरु अपनी माला शिष्य को दे सकते है अन्य कोई नहीं !

Tuesday, 28 May 2013

विवाहोपरांत स्त्री ने किस कुलदेवता का नाम जपने चाहिए ?


• शंका समाधान :
• विवाहोपरांत स्त्री ने किस कुलदेवता का नाम जपने चाहिए ?  
सामान्यतः विवाहोपरांत स्त्री का नाम बदलता है मायके का सभी कुछ त्याग कर स्त्री ससुराल में आती है | एक अर्थ से वह उसका पुनर्जन्म ही होता हैं इसलिए विवाहित स्त्री को अपने ससुराल के कुलदेवता का जप करना चाहिए यदि कोई स्त्री बचपन से विशेष नामजप कर रही हो व प्रगत साधक हो, तो विवाह के पश्चात भी वही नामजप जारी रखने में कोई हानि नहीं | यदि गुरु ने किसी स्त्री को उसके विवाह पूर्व नाम दिया हो तो उसे वही नाम जपना चाहिए | यदि स्त्री का सम्बन्ध विच्छेद हो गया हो और उसे संतान हो तो भी स्त्री ने अपने ससुराल के कुलदेवता का ही जप करना चाहिए | और यदि संतान न हो और अपने पिता के घर रह रही हो तो अपने पिता के कुलदेवता का जप करना चाहिए |